दबंग - जो किसी से ना डरे ; दबंग जो निरंकुश हो ; और दबंग यानि मूछो में सलमान खान बस एसा ही कुछ कहती है फिल्म दबंग । अभिनव कश्यप द्वारा निर्देशित और अरबाज़ एवं मलाईका अरोरा खान द्वारा निर्मित फिल्म दबंग पूरी तरह से सलमान मय है | फिल्म के हर द्रश्य में सिर्फ सल्लू भैया ही नज़र आते है | फिल्म की कहानी का मुख्या पात्र है चुलबुल पांडे( सलमान खान) जिसके परिवार में सौतेले पिता प्रजापति पांडे (विनोद खन्ना) सौतेला भाई मख्खन सिंह (अरबाज़ खान ) और माँ नलिनी (डिम्पल कपाडिया ) है | फिल्म में चुलबुल पांडे अपने पिता और भाई को खास पसंद नहीं करता है ]क्योकि उसके सौतेले पिता अक्सर चुलबुल और उसके भाई मख्खन में भेदभाव करते है | फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा रज्जो के किरदार में है जो मिटटी के बर्तन बनती है जिस पर चुलबुल फ़िदा है | फिल्म में आगे चुलबुल को एक भ्रष्ट परन्तु दबंग पुलिस अफसर के रूप में दिखाया है जो किसी की परवाह नहीं करता और एक स्थानीय नेता छेदीलाल से बैर मोल ले लेता है अब पूरी फिल्म चुलबुल पांडे और छेदी सिंह की रजिश पर चलती जाती है । फिल्म के अन्य किरदार में ॐ पूरी ,अनुपम खेर और महेश मांजरेकर जेसे मंझे हुए अभिनेता भी है परन्तु फिल्म में इनका रोल बहुत ही छोटा और संक्षिप्त है । फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा बहुत खुबसूरत लगी है पर अभिनय के मामले में कुछ खास नहीं कहा जा सकता । फिल्म की कहानी में कुछ भी ऐसा नहीं है जिससे नया और अलग कहा जा सके । फिल्म का गीत संगीत,फिल्म की मजबूत कड़ी है।
फिल्म में करेक्टर को स्थापित करने में अनुभव सिन्हा असफल रहे है । चुलबुल पांडे खुद को राबिन हुड कहते है परन्तु किसी भी द्रश्य में उन्हें गरीबो की मदद करते नहीं दिखाया जाता वंही फिल्म की पहली रील में ही मख्खन सिंह को मंद बुद्धि कह दिया जाता है, परन्तु पूरी फिल्म में उसकी हरकते एक सीधे और जक्क्हद व्यक्ति की है, मंद बुद्धि की नहीं ।
कुल मिला कर पूरी फिल्म में दिखाई देते है सिर्फ सलमान के एक्शन सीन ,बिना एक्सप्रेशन के डायलाग, और अजीब सी हरकते जो दर्शको का भरपूर मनोरंजन तो करते है पर दिमाग का कोई उपयोग नहीं करने देते| इसलिए थियेटर हाल में घुसने से पहले आप अपने दिमाग को छुटी पर भेज दे और फिर आराम से फिल्म देखे ;फिल्म में मजा आएगा ।